जिस के लिए मोदी की हो रही है तारीफ, कभी उसी के लिए लालू पर उठे थे सवाल

सेंट्रल डेस्क : प्रधानमंत्री मोदी की एक तस्वीर आजकल खूब वायरल हो रही है, जो उस विडियो से लिया गया है, जो उन्होंने खुद 23 अगस्त की सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किया था. विडियो में वह प्रधानमंत्री आवास के भीतर टहले रहे हैं, जहाँ कुछ मोर भी हैं. सारा विवाद इसी मोर से मोर से जुड़ा हुआ है. आगे बढ़ने से पहले आप ये विडियो एक बार देख लीजिये.

प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया से किया पोस्ट

क्या है पूरी “मोर” कहानी

दरअसल प्रधानमंत्री के इस विडियो की तुलना लगभग 3 साल पहले राजद सुप्रीमो लालू यादव के वाकये के साथ जोड़ा जा रहा है. उस वक़्त लालू यादव के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड पर कुछ मोर लाये गए थे. तब राजद नीतीश कुमार के साथ सत्ता में थी और वन विभाग के मंत्री, लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव थे.

wildlife protection act 1972 वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972

मोरों के सरकारी आवास पर ले जाने पर खूब विवाद उठा जिसे वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 का खुल्लमखुला उल्लंघन बताया गया था. अब क्या कहता है ये एक्ट, हम बताते हैं…

वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972

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इस एक्ट के अंतर्गत आने वाले पशु या पक्षी को कैद करना या अपने घर में रखना कानून जुर्म है. इसके भीतर, मोर, तोता, बंदर और अन्य कई जानवर आते हैं, जिनको पालने या कैद करने पर आप पर भारी भरकम जुर्माना या जेल की सजा प्रावधान है.

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उस वक़्त खबर के उठने पर मोरों को वापस मंगा लिया गया था. इस पर पटना जू के एक सीनियर अधिकारी ने कहा था कि, उस इलाके के वातावरण को शुद्ध करने के लिए मोरों को वहां छोड़ा गया था. अब इसी एक्ट का हवाला दे कर प्रधानमंत्री से सवाल उठ रहे हैं. कुछ लोग इसे मोदी का प्रकृति प्रेम बता रहे हैं तो कुक लोग इसे कानून का उल्लंघन.

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