कोरोना वायरस : “MLA के बच्चे कोटा से आ गए, तो गरीब बच्चे क्यों नहीं?”

पटना: बिहार सरकार कोटा में पढ़ रहे बिहारी छात्रों को वापस बिहार लाने पक्ष में नहीं हैं। क्योंकि कोरोना वायरस के कारण स्थिति भयावह न हो जाये। इसी बीच बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक आधिकारिक पास की तस्वीर ट्वीट करते हुए सरकार से सवाल पूछा है कि बिहार के लोगों के साथ यह दोहरा रवैया क्यों?

गरीब बच्चों को सरकार कोरोना वायरस के कारण बुलाने से मना करती है। वहीँ माननीयों को पास जारी करती है, कि वो कोटा में पढ़ रहे अपने बच्चों को सुरक्षित घर ले आएं।

क्या है पास में?

MLA अनिल सिंह को जारी पास में उन्हें नवादा से कोटा तक जाने और वहाँ से आने का पास है। पास जारी करने का कारण है “कोटा में फंसे पुत्र को लेन हेतु”। 15 अप्रैल को जारी इस की वैलिडिटी 16 अप्रैल से 25 अप्रैल तक है। इसे लेकर बिहार का विपक्ष सवाल दाग रहा है। पूछ रहा है बिहार के बच्चों ने क्या बिगाड़ा है ?

बता दें कि बिहार के लगभग 1000 से अधिक बच्चें कोटा में फंसे हुए है, लेकिन बिहार सरकार उनको लाने को राजी नहीं है। यूपी , बंगाल और अन्य राज्यो की सरकार अपने यहाँ के छात्रों को बुलाने के लिए बस भेज चुकी है।

MLA अनिल सिंह क्या बोले?

हिसुआ MLA अनिल सिंह ने कहा कि “मैंने कोई नियम नहीं तोडा। नियम के अनुसार पास लिया है आने-जाने के दौरान हमारी थर्मल स्क्रीनिंग भी की गयी। इस मामले को तूल देने का कोई मतलब नहीं है। केवल मैंने ही नहीं 700 अन्य लोगों ने भी पास लिया है।”

देश में लॉकडाउन है। देश के कई हिस्सों में बिहारी प्रवासी फंसे हुए हैं। चाहे वो मजदूर हो या दूसरे राज्यों में पढ़ने गए बच्चे, हर कोई बस अपने परिवार के पास लौट जाना चाहता है। आजकल चर्चा में हैं कोटा में पढाई करने गए बिहारी छात्र। वो घर वापस आना चाहते है, लेकिन लॉकडाउन को समर्थन करने वाले बिहार प्रदेश के मुखिया नीतीश कुमार का कहना है, कि जो जहाँ हैं वो वहीँ रहे। नहीं तो, लॉकडाउन का कोई मतलब नहीं रह जायेगा। कोरोना से स्थिति भयावह हो सकती है।

कोटा में फंसे बिहारी बच्चों की क्या है हालत, इस वीडियो में देखें। बिहार और देश-दुनिया से जुडी खबरों के लिए फॉलो करें https://khabri.live .

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